“PAK के लिए जासूसी? यूट्यूबर ज्योति (Jyoti Malhotra) की अरेस्ट ने बढ़ाई सनसनी”
भूमिका
भारत-पाकिस्तान संबंधों में सदैव तनाव रहा है और जासूसी के केस अक्सर सुर्खियाँ बटोरते हैं, लेकिन 17 मई 2025 को आया एक मामला इसलिए अलग है क्योंकि इसमें डिजिटल दौर की चर्चित हस्ती—यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा—पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने का आरोप लगा है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ इस प्रसिद्ध कंटेंट-क्रिएटर के मोबाइल, लैपटॉप व सोशल-मीडिया रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
कौन हैं ज्योति मल्होत्रा?
“ट्रैवल विद जो” चैनल की स्टार
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हरियाणा के हिसार की रहने वाली 33-वर्षीय ज्योति का यूट्यूब चैनल “Travel With Jo” 3.77 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबरों वाला लोकप्रिय ट्रैवल व्लॉग है।
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उन्होंने भारत-पाक “people-to-people contact” को बढ़ावा देने वाले वीडियो बनाए, जिनमें लाहौर, इस्लामाबाद और करतारपुर साहिब की यात्राएँ शामिल रहीं।
डिजिटल-सेलिब्रिटी से संदिग्ध तक
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2023 में पहली पाकिस्तान यात्रा के दौरान वे पाक उच्चायोग के अधिकारी अहसान-उर-रहीम से मिलीं। आरोप है कि यहीं से संवेदनशील संपर्क स्थापित हुआ।
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लौटने के बाद भी व्हाट्सऐप, टेलीग्राम व ई-मेल के जरिए संवाद जारी रहा और धीरे-धीरे “ट्रैवल कंटेंट” की आड़ में खुफिया सूचनाएँ साझा करने का सिलसिला शुरू हुआ।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
दो महीने की तकनीकी निगरानी
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हिसार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मार्च 2025 से उनके फोन-रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन पर नजर रखनी शुरू की।
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संदिग्ध चैट-लॉग में अत्यधिक डिटेल वाले स्थान-चित्र, मिलिट्री इंस्टॉलेशन का जिओ-टैग, सीमा पर BSF पेट्रोलिंग टाइम-टेबल जैसी जानकारियाँ मिलीं।
15 मई 2025—रेड और हिरासत
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DSP जितेंद्र कुमार की टीम ने 15 मई को सुबह 6 बजे हिसार स्थित घर से ज्योति को पकड़ा; “Official Secrets Act 1923” व IPC की जासूसी धाराएँ लगाईं गईं।
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17 मई को कोर्ट में पेशी पर उन्हें पाँच दिन की पुलिस रिमांड मिली।
आरोप क्या-क्या हैं?
“सोशल-इंजीनियरिंग” से डेटा चुराना
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एजेंसियों के अनुसार ज्योति को भारतीय सैन्य पृष्ठभूमि वाले दर्शकों से चैट में घुलने-मिलने की कला आती थी; फैन-इंटरेक्शन की आड़ में वे संवेदनशील फोटो और वीडियो मंगाती थीं।
विदेशी फंडिंग और हवाला ट्रेल
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आरोप है कि पाकिस्तान हाई कमीशन दिल्ली स्थित “दानिश” नामक अधिकारी ने उन्हें तीन बार नकद व दो बार हवाला चैनल से भुगतान कराया; कुल रकम लगभग ₹18 लाख बताई जा रही है।
आईएसआई से सीधा संपर्क
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एक लीक ई-मेल में “ISI Desk-K” का उल्लेख मिला, जिसमें भारतीय सैन्य तैनाती का मासिक अपडेट माँगा गया था।
जाँच का मौजूदा स्टेटस
डिवाइस फॉरेंसिक
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उनके MacBook व iPhone से 2 TB क्लाउड-बैकअप डाउनलोड कर CERT-In लैब भेजा गया है।
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प्रारंभिक विश्लेषण में 37 एन्क्रिप्टेड ZIP फाइलें मिलीं जिनके पासवर्ड अब तक नहीं खुले।
नेटवर्क का विस्तार
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पिछले एक हफ्ते में हरियाणा-पंजाब से छह अन्य “PAK हैंडलर-लिंक्ड” संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। ज्योति से उनकी कड़ी पुष्टि होने पर राजद्रोह जैसी धाराएँ जुड़ सकती हैं।
परिवार और समर्थकों का पक्ष
“सिर्फ़ एक घुमक्कड़ लड़की”—पिता
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पिता का बयान: “मेरी बेटी निर्दोष है; उसने सिर्फ़ दोस्ती निभाई और विंडो टू पाकिस्तान वाली सोच रखती है।” YouTube
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वकील ने तर्क दिया कि यात्रा कंटेंट सार्वजनिक डोमेन का है, कोई क्लासीफाइड डॉक्यूमेंट बरामद नहीं हुआ।
यूट्यूब समुदाय में हलचल
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तमाम ट्रैवल-व्लॉगर्स ने चैनल से संबंधित वीडियोज “प्राइवेट” करने शुरू कर दिए, डर है कि सीमा-पार शूट किए फुटेज को “जासूसी मटेरियल” माना जा सकता है।
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#JusticeForJyoti और #NationFirst ट्रेंड के रूप में ट्विटर/X पर ध्रुवीकरण दिखा।
कानून क्या कहता है?
Official Secrets Act 1923
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किसी भी “prohibited place” की तस्वीर, स्केच या जानकारी का संचार दूसरे देश को देना गैर-जमानती अपराध है; दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 14 साल कारावास।
IT Act व UAPA की संभावनाएँ
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यदि फंडिंग सीधे “शत्रु राष्ट्र” से सिद्ध होती है तो “UAPA 2019” की धारा 17 (टे़रर-फंडिंग) भी लग सकती है।
सोशल-मीडिया सितारों के लिए सबक
पारदर्शिता और सावधानी
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विदेश यात्राओं की ड्यू-डिलिजेंस—सरकारी अनुमति व ट्रैवल-लॉग की कॉपी रखें।
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फैन-इंटरेक्शन फ़िल्टर—सैन्य या संवेदनशील नौकरी वाले दर्शकों से निजी डेटा न माँगें।
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फंडिंग का ऑडिट—स्पॉन्सरशिप व डोनेशन के स्रोत सार्वजनिक करें।
प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका
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यूट्यूब की “सेफ्टी टीम” संदिग्ध कंटेंट का रिव्यू कर सकती है, पर प्राथमिक जिम्मेदारी क्रिएटर की है।
निष्कर्ष
ज्योति मल्होत्रा की कहानी डिजिटल-ग्लैमर और राष्ट्रीय-सुरक्षा के टकराव का ताज़ा उदाहरण है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह केस बताएगा कि सोशल-मीडिया की चमकदार दुनिया में भी गहराई से छिपे ख़तरे मौजूद हैं। दूसरी ओर, अगर वह निर्दोष साबित होती हैं, तो यह सतर्कता-व्यवस्था पर सवाल उठाएगा कि व्यापक निगरानी के बीच रचनात्मक स्वतंत्रता कैसे सुरक्षित रहे। फिलहाल जाँच जारी है और अगली कोर्ट सुनवाई 22 मई 2025 को तय है।
अपडेट ट्रैक करें: जैसे-जैसे एजेंसियाँ डेटा डिक्रिप्ट कर आगे बढ़ेंगी, हम आपको नवीनतम विवरण उपलब्ध कराते रहेंगे।
Dainik Bharat Times is authored by Jaideep Kirad who also the founder of the website that produces informative tech, lifestyle and general public matters news in Hindi with appropriate?




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