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Brain eating Amoeba

दिमाग खाने वाला अमीबा (Brain eating Amoeba): केरल में 19 मौतें, जानें बीमारी की पूरी डिटेल

केरल में इस समय एक खतरनाक बीमारी की चर्चा है। इसका कारण है एक दिमाग खाने वाला अमीबा (Brain eating Amoeba)। यह पानी में रहने वाला एक सूक्ष्म जीव है जो नाक से शरीर में घुसकर सीधे दिमाग तक पहुँच जाता है और जानलेवा बीमारी PAM (Primary Amoebic Meningoencephalitis) पैदा करता है। इस साल केरल में अब तक 69 मामले सामने आए हैं और 19 लोगों की मौत हो चुकी है।


Brain-eating-Amoeba-1 दिमाग खाने वाला अमीबा (Brain eating Amoeba): केरल में 19 मौतें, जानें बीमारी की पूरी डिटेल
दिमाग खाने वाला अमीबा (Brain eating Amoeba)

सवाल 1: दिमाग खाने वाला अमीबा (Brain eating Amoeba) क्या है और कितना खतरनाक है?

अमीबा (Brain eating Amoeba) एक छोटा सा जीव है जो तालाब, झील, नदी और गुनगुने पानी में रहता है। यह नाक से शरीर में घुसकर दिमाग को नुकसान पहुँचाता है। इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसका मौत का प्रतिशत 95-97% तक है। यानी इलाज देर से शुरू हुआ तो बचना बहुत मुश्किल है।


सवाल 2: ये अमीबा (Brain eating Amoeba) दिमाग में कैसे पहुँचता है?

यह अमीबा नाक के रास्ते शरीर में घुसता है। जब कोई व्यक्ति नदी, तालाब या गंदे पानी में तैरता है और पानी नाक में चला जाता है, तब यह अमीबा दिमाग तक पहुँच जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को खा जाता है और दिमाग में सूजन पैदा करता है।


सवाल 3: अमीबा (Brain eating Amoeba) दिमाग में घुस जाए तो कौन से लक्षण दिखते हैं?

पहले तो हल्के लक्षण दिखते हैं, लेकिन बीमारी तेजी से बढ़ती है।

शुरुआती लक्षण:

  • तेज़ बुखार

  • सिरदर्द

  • मिचली और उल्टी

बाद के लक्षण:

  • गर्दन अकड़ना

  • दिमागी भ्रम और चक्कर

  • दौरे पड़ना

  • रोशनी से तकलीफ़

  • कोमा तक हो जाना


सवाल 4: क्या मौत का आंकड़ा सच में इतना ज्यादा है?

हाँ, यह बीमारी बेहद खतरनाक है। दुनिया भर में लगभग 97% मरीज नहीं बच पाते। लेकिन केरल में समय रहते इलाज मिलने से कुछ मरीज बच पाए हैं। इस साल 69 केस में से 19 लोगों की मौत हुई है, यानी लगभग 24% मृत्युदर रही है, जो बाकी दुनिया से थोड़ी बेहतर है।


सवाल 5: क्या ये खतरनाक बीमारियाँ सिर्फ केरल में ही फैलती हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है।

  • कोरोना पूरी दुनिया में फैला।

  • निपाह वायरस पहले भी केरल और बंगाल जैसे राज्यों में देखा गया।

  • अमीबा की बीमारी भी अलग-अलग देशों में मिल चुकी है।

बस फर्क इतना है कि केरल में इस साल केस ज्यादा सामने आए हैं।


सवाल 6: इस बीमारी से बचने के लिए क्या सावधानियाँ रखें?

  • गंदे या गुनगुने पानी में तैरने से बचें।

  • तैरते समय नाक में पानी न जाने दें, नाक क्लिप का इस्तेमाल करें।

  • स्विमिंग पूल का पानी हमेशा साफ और क्लोरीनयुक्त होना चाहिए।

  • नाक की सफाई के लिए उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।

  • अगर तैराकी के बाद बुखार, सिरदर्द या उल्टी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।


सवाल 7: क्या हर अमीबा एक जैसा होता है?

नहीं। कई तरह के अमीबा होते हैं, लेकिन दिमाग को नुकसान पहुँचाने वाला सिर्फ Brain eating Amoeba है। बाकी अमीबा शरीर के अलग हिस्सों में परेशानी कर सकते हैं।


सवाल 8: क्या बच्चे और स्कूल जाने वाले भी शिकार हो रहे हैं?

हाँ, यह बीमारी बच्चों और बड़ों दोनों में देखी गई है। बच्चे ज्यादा संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनका शरीर कमजोर होता है। अगर बच्चे तालाब या झील में तैरते हैं तो खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए माता-पिता और स्कूलों को खास सावधानी रखनी चाहिए।


निष्कर्ष

अमीबा (Brain eating Amoeba) पानी में रहने वाला एक छोटा जीव है, जो नाक के रास्ते शरीर में घुसकर दिमाग तक पहुँच जाता है। यह जानलेवा बीमारी PAM पैदा करता है, जिसमें शुरुआती लक्षण बुखार, सिरदर्द और उल्टी होते हैं, जबकि बाद में दिमागी भ्रम, दौरे और कोमा हो सकता है। इस बीमारी का मृत्यु दर बहुत ज्यादा है, हालांकि केरल में समय रहते इलाज से कुछ मरीज बच पाए हैं। बचाव के लिए गंदे पानी से तैरने से बचना, नाक में पानी न जाने देना और साफ पानी का इस्तेमाल जरूरी है। बच्चे और बड़े दोनों को सावधान रहना चाहिए।

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Dainik Bharat Times is authored by Jaideep Kirad who also the founder of the website that produces informative tech, lifestyle and general public matters news in Hindi with appropriate?

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