FASTag Scam अलर्ट: साइबर ठगों का नया निशाना ‘फास्टैग’
परिचय
डिजिटल इंडिया के बढ़ते कदमों ने आम नागरिकों को कई सुविधाएँ दी हैं। उन्हीं में से एक है फास्टैग (FASTag), जिसने टोल टैक्स भुगतान को बेहद आसान और कैशलेस बना दिया। लेकिन जहां सुविधाएँ बढ़ती हैं, वहीं साइबर अपराधियों के मौके भी बढ़ जाते हैं। आजकल ठग फास्टैग को नए जाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे:
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फास्टैग स्कैम (FASTag Scam) क्या होता है?
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इसके सामान्य तरीके और पहचान के संकेत
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सावधानियाँ और सुरक्षा उपाय
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अगर शिकार बन जाएं तो क्या करें
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और अंत में यह भी कि क्या हर बैंक या कंपनी का फास्टैग सुरक्षित है?
FASTag Scam क्या होता है?
फास्टैग स्कैम में साइबर ठग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर उनके बैंक विवरण, फास्टैग आईडी या OTP जैसी निजी जानकारी हासिल करते हैं। इसके बाद उनका खाता खाली कर दिया जाता है या अनधिकृत ट्रांजैक्शन कर लिए जाते हैं।
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कई बार नकली वेबसाइट या फिशिंग लिंक के जरिए लोगों से डेटा लिया जाता है।
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कभी-कभी ठग फर्जी ग्राहक सेवा का रूप लेकर फोन करते हैं और KYC अपडेट के नाम पर धोखा देते हैं।
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कुछ मामलों में तो फर्जी फास्टैग बिक्री भी हो जाती है।
👉 संक्षेप में, फास्टैग स्कैम एक ऐसा साइबर अपराध है जो आपकी वित्तीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। इसे समझना और पहचानना ही बचाव का सबसे पहला कदम है।
फास्टैग से जुड़े सबसे आम फ्रॉड कौन-कौन से हैं?
1. फिशिंग SMS या ईमेल
ठग ऐसे मैसेज भेजते हैं जिनमें लिंक होता है। वह लिंक देखने में तो असली वेबसाइट जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में वह नकली पोर्टल होता है। जैसे ही आप लॉगिन करते हैं या डिटेल डालते हैं, ठग आपके बैंक और फास्टैग से जुड़ी जानकारी चुरा लेते हैं।
👉 याद रखें, असली बैंक या NHAI कभी भी किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर नहीं करते।
2. फेक कस्टमर सपोर्ट
साइबर अपराधी कॉल या मैसेज करके खुद को बैंक या फास्टैग कस्टमर केयर अधिकारी बताते हैं। वे कहते हैं कि आपका फास्टैग ब्लॉक हो जाएगा या KYC अधूरी है। इसके बाद OTP, डेबिट कार्ड नंबर या UPI पिन मांगते हैं।
👉 यदि कोई कॉल करने वाला आपसे निजी जानकारी मांगे, तो मान लें कि वह ठग है।
3. फर्जी फास्टैग बिक्री
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या अनधिकृत एजेंट्स नकली फास्टैग बेचते हैं। ग्राहक पैसे दे देता है लेकिन वह टैग काम नहीं करता। कई बार इन टैग्स से डेटा भी चोरी हो सकता है।
👉 फास्टैग हमेशा सिर्फ अधिकृत बैंक या NHAI पोर्टल से ही खरीदें।
4. ट्रांजैक्शन में अनियमित कटौती
कभी-कभी क्लोनिंग या तकनीकी गड़बड़ी के कारण आपके खाते से पैसे कट जाते हैं जबकि आपने टोल पार भी नहीं किया। यह डुप्लीकेट कटौती भी एक प्रकार का फ्रॉड है।
👉 अगर आपके साथ ऐसा होता है तो तुरंत शिकायत दर्ज करें और रिफंड की मांग करें।
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फास्टैग स्कैम (FASTag Scam) की पहचान कैसे कर सकते हैं? (5 संकेत)
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अनचाहे कॉल या संदेश – अगर कोई अनजान नंबर से कॉल या SMS करके KYC, OTP या पासवर्ड मांग रहा है, तो सावधान हो जाएँ।
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संदिग्ध वेबसाइट लिंक – असली लिंक हमेशा “.gov.in” या बैंक की आधिकारिक डोमेन पर होते हैं।
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फर्जी ग्राहक सेवा नंबर – गूगल पर दिखे किसी भी नंबर पर भरोसा न करें, सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट वाले नंबर ही सही हैं।
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अनपेक्षित कटौती – यदि बिना टोल पार किए आपके खाते से पैसे कट रहे हैं तो तुरंत बैंक और NHAI को रिपोर्ट करें।
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लूज या नकली फास्टैग – असली फास्टैग हमेशा सही ढंग से विंडस्क्रीन पर चिपकता है। नकली टैग सामान्यत: काम नहीं करते।
👉 इन संकेतों को पहचान कर आप समय रहते ठगी से बच सकते हैं।
फास्टैग लेते हुए हमेशा बरतें ये 6 सावधानियाँ
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सिर्फ आधिकारिक प्लेटफॉर्म से खरीदें
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फास्टैग हमेशा NHAI, NPCI, अधिकृत बैंकों या “MyFASTag” ऐप से ही लें।
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OTP और PIN साझा न करें
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कोई भी बैंक या एजेंसी आपसे कभी OTP या UPI पिन नहीं मांगती।
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क्लिक करने से पहले लिंक की जांच करें
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असली वेबसाइट पर “https://” और सही डोमेन होगा। गलत स्पेलिंग या अजीब डोमेन देखकर सतर्क हो जाएं।
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नियमित रूप से ट्रांजैक्शन चेक करें
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अपने फास्टैग अकाउंट और बैंक अलर्ट पर नजर रखें। छोटी-सी अनियमितता भी बड़े नुकसान से बचा सकती है।
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ग्राहक सेवा नंबर की पुष्टि करें
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नंबर सिर्फ आधिकारिक पोर्टल से लें। गूगल सर्च पर दिखे किसी भी नंबर पर भरोसा न करें।
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फास्टैग को सही ढंग से चिपकाएँ
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लूज टैग ब्लैकलिस्ट हो सकता है, इसलिए उसे मजबूती से विंडस्क्रीन पर लगाएँ।
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👉 इन 6 नियमों का पालन करना आपकी सुरक्षा के लिए ढाल का काम करेगा।
क्या फास्टैग से जुड़ी जानकारी लीक होना भी खतरा है?
हाँ, बिल्कुल। अगर आपकी फास्टैग ID, बैंक अकाउंट डिटेल, मोबाइल नंबर या पर्सनल जानकारी लीक हो जाती है तो साइबर ठग आसानी से आपके अकाउंट तक पहुँच सकते हैं। कई बार यह जानकारी डार्क वेब पर भी बेची जाती है।
👉 इसलिए व्यक्तिगत जानकारी हमेशा सुरक्षित रखें और संदिग्ध मैसेज/कॉल का जवाब न दें।
अगर फास्टैग स्कैम का शिकार हो जाएँ तो क्या करें?
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तुरंत बैंक/फास्टैग जारीकर्ता को सूचित करें
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अपना खाता ब्लॉक कराएँ और नया PIN सेट करें।
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साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
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आप राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
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रिफंड के लिए शिकायत दर्ज करें
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गलत कटौती होने पर NHAI के हेल्पलाइन नंबर 1033 पर कॉल करें।
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प्रमाण सुरक्षित रखें
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ईमेल, SMS, ट्रांजैक्शन आईडी और स्क्रीनशॉट सबूत के तौर पर रखें।
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👉 जल्दी कदम उठाने से आपके पैसे बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
क्या हर बैंक या कंपनी का फास्टैग सुरक्षित होता है?
आम तौर पर हाँ, लेकिन पूरी तरह नहीं। NPCI और NHAI के नियमों के तहत अधिकृत बैंक ही फास्टैग जारी करते हैं। फिर भी, सुरक्षा का बड़ा हिस्सा उपयोगकर्ता की सतर्कता पर निर्भर करता है।
👉 अगर आप आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं और बुनियादी सावधानियाँ बरतते हैं, तो आपके फास्टैग की सुरक्षा काफी हद तक सुनिश्चित रहती है।
निष्कर्ष
साइबर अपराध तेजी से बदल रहा है और अब फास्टैग इसका नया निशाना बन गया है। लेकिन थोड़ी सी सतर्कता और सही जानकारी आपको इन ठगों से बचा सकती है।
याद रखें:
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5 संकेतों से फ्रॉड पहचानें।
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6 सावधानियाँ हमेशा अपनाएँ।
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अगर धोखा हो जाए तो तुरंत रिपोर्ट करें।
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और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता दें।
👉 साइबर लिटरेसी का असली मतलब यही है कि तकनीक का इस्तेमाल समझदारी से करें और खुद को तथा अपने पैसों को सुरक्षित रखें।
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