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Samosa Jalebi Side Effects

🛑 समोसा-जलेबी रोज खाते हैं? तो ज़रा ये सच भी जान लीजिए (Samosa Jalebi Side Effects)

🍽️ क्यों आई ये खबर?

हाल ही में सरकार ने एक पहल की है जिसमें ऑफिसों, स्कूलों और कॉलेजों में “ऑयल और शुगर बोर्ड” लगाने की सलाह दी गई है।
👉 इसका मतलब ये नहीं है कि समोसा या जलेबी पर सिगरेट जैसी चेतावनी लगेगी।
👉 बल्कि, इसका मकसद है कि लोग अत्यधिक तेल और चीनी से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक हों।


💔 समोसा-जलेबी खाने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? (Samosa Jalebi Side Effects)

⚠️ रोजाना समोसा-जलेबी खाने के खतरे

1. ट्रांस फैट = दिल की बीमारियाँ

  • समोसा और कचौरी को डीप फ्राई किया जाता है।

  • इनमें बार-बार गर्म किया गया तेल होता है, जिससे ट्रांस फैट बनते हैं।

  • इससे ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियाँ होने की आशंका बढ़ती है।


2. अत्यधिक चीनी = डायबिटीज और फैटी लिवर

  • जलेबी जैसी मिठाइयों में शुद्ध चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है।

  • रोज खाने से ब्लड शुगर लेवल बार-बार बढ़ता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।

  • शरीर में फैटी लिवर और वजन बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।


3. मैदा = पाचन की समस्या और सूजन

  • इन स्नैक्स में इस्तेमाल होता है रिफाइंड मैदा, जिसमें फाइबर न के बराबर होता है।

  • यह कब्ज, गैस और पेट की सूजन का कारण बनता है।

  • लंबे समय तक यह गट हेल्थ (आंतों की सेहत) को बिगाड़ सकता है।


4. मोटापा और कम ऊर्जा

  • रोज इन चीज़ों का सेवन करने से शरीर में अवांछित कैलोरी और सैचुरेटेड फैट जमा होता है।

  • इससे मोटापा और थकान, दोनों बढ़ते हैं।

  • ऊर्जा का असंतुलन शरीर को सुस्त बनाता है।


5. बच्चों पर दोगुना असर

  • बच्चों के शरीर पर इनका असर और भी खतरनाक होता है क्योंकि उनका मेटाबोलिज्म विकसित हो रहा होता है।

  • बचपन में ही मोटापा, हाई बीपी, और शुगर की शुरुआत हो सकती है।


✅ डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

“इन चीज़ों का सेवन कभी-कभार ही करें। अगर आप रोज ऐसा खाना खा रहे हैं, तो समझिए आप धीरे-धीरे बीमारी की ओर बढ़ रहे हैं।”
– डॉ. संजय चिवाने (हार्ट स्पेशलिस्ट)


🔁 तो क्या करें?

अगर आप… तो आप करें…
समोसा रोज खाते हैं हफ्ते में सिर्फ 1 बार खाएं और बेक्ड या एयर फ्राइड विकल्प चुनें
रोज मिठाई खाते हैं शुगर की जगह गुड़, खजूर, या फ्रूट्स लें
बाहर के स्नैक्स पसंद हैं घर पर खुद हेल्दी तरीके से बनाएं

🧠 निष्कर्ष:

समोसा, जलेबी और कचौरी जैसे देसी स्वादिष्ट स्नैक्स, जब कभी-कभार खाए जाएं, तो ठीक हैं।
लेकिन रोजाना सेवन = धीमा ज़हर

स्वाद लें, लेकिन सोच समझकर।
रोज नहीं, कभी-कभी।


🔄 सवाल: क्या कभी-कभार खाना भी गलत है?

हफ्ते में 1 या 2 बार थोड़ा खाना ठीक है, लेकिन अगर आप रोज खा रहे हैं या बहुत ज्यादा मात्रा में ले रहे हैं, तो ये भविष्य में बीमारियों की जड़ बन सकता है।


🍏 समोसा-जलेबी के हेल्दी विकल्प क्या हैं?

पारंपरिक स्नैक हेल्दी विकल्प
समोसा बेक्ड समोसा (ओट्स/सूजी बेस)
जलेबी गुड़-जलेबी (कम शुगर), ओवन में बनी
कचौरी बेक्ड या एयर फ्राय की हुई मूंग दाल कचौरी
भुजिया भुने चने, मखाने
वडा पाव ब्राउन ब्रेड पाव, बेक किया गया वडा
मिठाइयाँ खजूर-नट्स लड्डू, गुड़ से बनी बर्फी

👉 आप चाहें तो घर पर कम तेल में बनाकर इनका स्वाद ले सकते हैं — स्वाद भी रहेगा और सेहत भी।


🧠 डॉक्टर क्या कहते हैं?

डॉ. संजय चिवाने (कार्डियोलॉजिस्ट) कहते हैं:

“ट्रांस फैट शरीर में सूजन लाता है और दिल के लिए सबसे खतरनाक है।”

डॉ. उग्धाथ धीर (हार्ट स्पेशलिस्ट) का मानना है:

“ऐसे स्नैक्स मोटापा और हार्ट डिजीज की सबसे बड़ी वजह हैं।”


🍟 समोसा, जलेबी जैसे खराब स्नैक्स का हमारे ऊपर क्या असर पड़ता है?

असर विवरण
मोटापा अत्यधिक कैलोरी सेवन
डायबिटीज ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव
हृदय रोग ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल
पाचन तंत्र भारीपन, एसिडिटी
थकान और सुस्ती फास्ट डाइजेस्टिंग कार्ब्स से एनर्जी ड्रॉप

🤔 क्या देसी स्नैक्स भी खतरनाक हैं?

हां, कचौरी, वडा-पाव, दही-भल्ला जैसे देसी स्नैक्स भी खतरनाक हो सकते हैं अगर:

  • ज़्यादा फ्राई किए गए हों

  • पुराना तेल प्रयोग हुआ हो

  • हाइजीनिक ना हों

  • अधिक नमक और चीनी डाली गई हो

⚠️ ये इतने नुकसानदायक क्यों हैं?

क्योंकि इनमें 3 चीज़ें सामान्यतः अधिक मात्रा में होती हैं:

  1. रिफाइंड मैदा → फाइबर नहीं, डाइजेशन स्लो

  2. डीप फ्राइंग → ट्रांस फैट व ऑक्सीडाइज्ड तेल

  3. अतिरिक्त शुगर/नमक → डायबिटीज़/बीपी रिस्क

♨️ बार-बार तेल गर्म करने से क्या होता है?

बार-बार उपयोग में लाए गए तेल से बनते हैं:

  • Free Radicals – DNA को नुकसान

  • Acrylamide – न्यूरोलॉजिकल डैमेज

  • PAHs – कैंसरजन्य तत्व

🔬 WHO और ICMR दोनों ही सलाह देते हैं कि खाना पकाने में एक ही तेल को बार-बार गर्म न करें।


🛠️ इन्हें थोड़ा हेल्दी बनाने के आसान तरीके

तरीका विवरण
बेकिंग डीप फ्राइंग की जगह ओवन में पकाएँ
एयर फ्राइंग कम तेल, क्रिस्पी टेस्ट
हर्ब्स यूज़ करें चाट मसाला या नींबू से स्वाद बढ़ाएँ
गुड़ या शहद चीनी की जगह
साबुत अनाज मैदे की जगह ओट्स/बाजरा/मल्टीग्रेन

⚖️ स्वाद और सेहत का बैलेंस कैसे संभव है?

✅ हाँ, संभव है!

  1. “80-20 नियम” अपनाएं: 80% हेल्दी डाइट, 20% चिट मीट

  2. स्मार्ट कुकिंग: कम तेल, घर का बना खाना

  3. सीजनिंग का जादू: धनिया, नींबू, दही, मिर्च से स्वाद बढ़ाएं

  4. प्लेट डिवीजन: स्नैक + हरी सब्जी + सलाद का मिश्रण


📅 क्या हफ्ते में 1-2 बार खाना भी नुकसानदायक है?

🟡 Moderation is key
यदि आप सामान्य स्वास्थ्य वाले हैं, नियमित व्यायाम करते हैं, और पोर्शन कम रखते हैं—तो हफ्ते में 1-2 बार खाना उतना खतरनाक नहीं।
❌ लेकिन डायबिटिक, बीपी या दिल के मरीजों को टालना चाहिए।


👶 बच्चों के लिए कितना खतरनाक है?

  • बच्चों का पाचन, मेटाबोलिज्म और हार्मोनल सिस्टम अभी विकसित होता है।

  • डीप फ्राइड व अधिक शुगरयुक्त खाद्य पदार्थ अर्ली मोटापा, डायबिटीज़, दांत खराब, हाइपरएक्टिविटी का कारण बनते हैं।

🎯 स्कूल टिफिन में ताजगी से भरपूर विकल्प जैसे स्प्राउट्स, वेज पराठा, इडली दें।


🏃 अगर वर्कआउट करें तो भी नुकसान होता है?

हां, वर्कआउट करना एक लाभ है, लेकिन खराब डाइट को कंप्लीटली बैलेंस नहीं कर सकता

  • समोसा-जलेबी “Empty Calories” देते हैं → सिर्फ एनर्जी, कोई पोषण नहीं

  • वर्कआउट के बाद ऐसे स्नैक्स लेने से मेटाबोलिज्म पर उल्टा असर पड़ सकता है

✔️ एक्सरसाइज + अच्छी डाइट = हेल्दी लाइफ


⚖️ सुरक्षित मात्रा में चीनी, तेल, मैदा कितनी है?

घटक सुरक्षित मात्रा (प्रति दिन) स्रोत
चीनी 20-25 ग्राम WHO
तेल 2-3 चम्मच ICMR
मैदा जितना हो सके कम NIN

🔴 अधिक मात्रा में सेवन से इन्सुलिन रेसिस्टेंस, ब्लड शुगर स्पाइक, मोटापा होता है।

🧘 वर्कआउट से खतरा कम होता है?

हाँ, लेकिन सिर्फ कसरत करने से ये जहर खत्म नहीं हो जाता।
👉 स्वस्थ जीवनशैली + सही खानपान ही असली इलाज है।


✅ क्या स्वाद और सेहत का बैलेंस संभव है?

बिलकुल! ये हैं कुछ आसान टिप्स:

  • घर में एयर फ्रायर का इस्तेमाल करें

  • शुगर की जगह गुड़ या शहद लें

  • हफ्ते में एक ‘चीट डे’ रखें लेकिन संतुलन के साथ

  • बाहर का कम खाएं, घर में खुद बनाएं

  • हर स्नैक के बाद 15 मिनट की वॉक करें


📝 निष्कर्ष

  • समोसा, जलेबी बुरे नहीं हैं, लेकिन इनका अत्यधिक सेवन बुरा है

  • सरकार का मकसद आपको डराना नहीं, समझदार बनाना है।

  • हर चीज़ अगर सही मात्रा और सही तरीके से ली जाए तो स्वाद भी बचेगा और सेहत भी


📌 अंतिम सलाह:

अगली बार जब आप समोसे की चटनी में डुबकी लगाएं या जलेबी का रस चूसें, तो खुद से एक सवाल ज़रूर पूछें — “क्या मैं इसे रोज खा सकता हूँ बिना नुकसान के?”
जवाब अगर ‘नहीं’ है, तो उसके अनुसार फैसला लीजिए — क्योंकि सेहत ही सबसे बड़ी मिठाई है!

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Dainik Bharat Times is authored by Jaideep Kirad who also the founder of the website that produces informative tech, lifestyle and general public matters news in Hindi with appropriate?

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