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मई में शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष मिशन (Space Mission): भारत का नाम फिर रौशन होगा !

14 दिन रहेंगे स्पेस स्टेशन में, इतिहास रचने की तैयारी

भारत एक बार फिर अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के निवासी शुभांशु शुक्ला मई में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की यात्रा पर रवाना होंगे। वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय होंगे जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 14 दिन तक रहेंगे और वहां अनुसंधान कार्यों में हिस्सा लेंगे।

कौन हैं शुभांशु शुक्ला?

भारतीय वायुसेना से नासा तक का सफर

शुभांशु शुक्ला एक अनुभवी पायलट हैं, जिन्होंने भारतीय वायुसेना में बतौर टेस्ट पायलट कई वर्षों तक सेवाएं दी हैं। उनकी बेहतरीन कार्यशैली और टेक्निकल नॉलेज ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाया।

शिक्षा और प्रशिक्षण

उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी कानपुर से की और बाद में रूस और अमेरिका से स्पेस फ्लाइट से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग भी ली। पिछले दो वर्षों से वे नासा (NASA) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और अब उनकी मेहनत रंग ला रही है।

राकेश शर्मा के बाद एक और भारतीय का अंतरिक्ष सफर (Space Mission)

1984 में रचा गया था पहला इतिहास

40 साल पहले, 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के सहयोग से स्पेस की यात्रा की थी। वे पहले भारतीय थे जिन्होंने अंतरिक्ष में कदम रखा। राकेश शर्मा ने अपने ऐतिहासिक मिशन में भारत का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया था।

space-mission-iss-1024x1024 मई में शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष मिशन (Space Mission): भारत का नाम फिर रौशन होगा !

अब शुभांशु लिखेंगे नया अध्याय

अब 2025 में, शुभांशु शुक्ला राकेश शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय बनेंगे। यह भारत के लिए “स्पेस डिप्लोमेसी” और विज्ञान की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) क्या है?

धरती से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर

ISS पृथ्वी की कक्षा में स्थित एक मानव निर्मित प्रयोगशाला है। इसमें कई देश मिलकर रिसर्च करते हैं, जिसमें अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी जैसे देश शामिल हैं।

रिसर्च और प्रयोगों का हब

यहां मेडिकल, जैविक, भौतिक और खगोलीय शोध किए जाते हैं। शुभांशु शुक्ला वहां भारतीय वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे, जिनसे भविष्य में भारत के स्पेस मिशन को नई दिशा मिलेगी।

शुभांशु का मिशन: क्या होंगे प्रमुख कार्य?

भारतीय उपकरणों की टेस्टिंग

मिशन के दौरान शुभांशु शुक्ला भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित कुछ खास उपकरणों और सॉफ्टवेयर्स की स्पेस में टेस्टिंग करेंगे।

माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग

वे माइक्रोग्रैविटी (microgravity) यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। इसके अलावा वे अंतरिक्ष में जीवन को और सुरक्षित व टिकाऊ बनाने की दिशा में भी रिसर्च करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग

इस मिशन में भारत और अमेरिका की स्पेस एजेंसियों के बीच सहयोग की मिसाल देखने को मिलेगी। शुभांशु भारतीय वैज्ञानिकों के प्रतिनिधि के तौर पर वहां होंगे।

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह मिशन?

वैज्ञानिक उपलब्धि

शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष में भागीदारी को दर्शाता है। इससे भारत को स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी।

युवाओं को प्रेरणा

यह मिशन देश के युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने के लिए प्रेरणा देगा। शुभांशु एक “रोल मॉडल” बनकर उभरेंगे।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मजबूती

भारत और अमेरिका के बीच वैज्ञानिक और तकनीकी संबंधों में और मजबूती आएगी। इससे भविष्य में साझा मिशनों की संभावनाएं और भी प्रबल होंगी।

तैयारी कैसी चल रही है?

कठोर प्रशिक्षण

शुभांशु पिछले 24 महीनों से अमेरिका में नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में कठोर प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसमें स्पेसवॉक, रोबोटिक्स, मेडिकल इमरजेंसी और माइक्रोग्रैविटी में काम करने की ट्रेनिंग शामिल है।

भारतीय वैज्ञानिकों की टीम का सहयोग

इस मिशन के लिए ISRO और DRDO की टीम भी सहयोग कर रही है। शुभांशु को विशेष भारतीय उपकरण और प्रयोगों की जानकारी दी गई है।

शुभांशु शुक्ला की प्रतिक्रिया

“मैं भारत का प्रतिनिधित्व कर गर्व महसूस कर रहा हूँ”

एक मीडिया इंटरव्यू में शुभांशु ने कहा –

“मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। यह मिशन सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे देश का है।”

आगे की राह

भारत का अंतरिक्ष भविष्य उज्जवल

शुभांशु शुक्ला की यह ऐतिहासिक यात्रा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। ISRO भी अपने गगनयान मिशन की तैयारी में है, और यह मिशन उससे पहले एक प्रेरक कदम साबित हो सकता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

इतिहास में दर्ज होगा शुभांशु का नाम

शुभांशु शुक्ला का नाम अब भारत के अंतरिक्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। वे ना सिर्फ पहले भारतीय होंगे जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जाएंगे, बल्कि एक प्रेरणास्त्रोत भी बनेंगे।

भारत को उन पर गर्व है और देश की नजरें अब इस ऐतिहासिक मिशन पर टिकी हैं।

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Dainik Bharat Times is authored by Jaideep Kirad who also the founder of the website that produces informative tech, lifestyle and general public matters news in Hindi with appropriate?

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